आज के दौर में तेजी से वजन कम करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन काफी बढ़ गया है। इस तरीके में व्यक्ति दिन के कुछ तय घंटों में ही भोजन करता है और बाकी समय उपवास रखता है। वजन नियंत्रित करने के साथ-साथ कुछ शोधों में इसके ब्लड प्रेशर और आराम की अवस्था में दिल की धड़कन पर सकारात्मक प्रभाव के संकेत भी मिले हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या उपयुक्त है।
खासकर पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों या नियमित रूप से दवाइयां लेने वालों को इसे शुरू करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। लंबे समय तक भोजन न करने से कुछ लोगों में सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर या ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए वजन घटाने के लिए फास्टिंग शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग से मिल सकते हैं ये फायदे
इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे प्रमुख उद्देश्य खाने की अवधि को सीमित करना है। इससे कई लोगों में कुल कैलोरी का सेवन कम हो सकता है, जिसके चलते वजन घटाने में मदद मिल सकती है।
कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिला है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और आराम की अवस्था में दिल की धड़कन कम करने में मदद कर सकती है। एक अध्ययन में 16 घंटे तक उपवास रखने वाले पुरुषों में शरीर की चर्बी कम होने के संकेत देखे गए थे।
हालांकि, इन अध्ययनों के परिणामों को हर व्यक्ति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। फास्टिंग का असर व्यक्ति की उम्र, वजन, खान-पान, जीवनशैली और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
लंबे समय तक खाना न खाने से सिरदर्द की समस्या
इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने के बाद कुछ लोगों को सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। लंबे समय तक भोजन न मिलने के कारण शरीर में होने वाले बदलाव इसके पीछे एक कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों को इसके साथ कमजोरी या चक्कर भी महसूस हो सकते हैं।
2020 में प्रकाशित एक समीक्षा में भी इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वाले लोगों में सिरदर्द की समस्या सामने आई थी। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में समान नहीं होता। किसी व्यक्ति को हल्का सिरदर्द हो सकता है, जबकि किसी अन्य को ज्यादा परेशानी महसूस हो सकती है।
अगर फास्टिंग के दौरान बार-बार या तेज सिरदर्द की समस्या हो रही है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
डायबिटीज के मरीज रहें विशेष सावधान
डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करना सामान्य लोगों की तुलना में अधिक सावधानी की मांग करता है। लंबे समय तक भोजन न करने से ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
खासकर इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली दवाइयां लेने वाले लोगों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को केवल वजन कम करने के उद्देश्य से अपने स्तर पर फास्टिंग शुरू नहीं करनी चाहिए। उन्हें पहले डॉक्टर से सलाह लेकर यह तय करना चाहिए कि उनके लिए किस तरह का खान-पान और भोजन का समय सुरक्षित रहेगा।
नियमित दवा लेते हैं तो पहले डॉक्टर से पूछें
अगर कोई व्यक्ति ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की दवाइयां नियमित रूप से ले रहा है, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
फास्टिंग के कारण भोजन करने का समय बदल जाता है और ऐसे में कुछ दवाइयों के सेवन का समय भी प्रभावित हो सकता है। वहीं, कुछ दवाइयां भोजन के साथ लेना जरूरी होता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने पर कमजोरी या चक्कर जैसी समस्या भी हो सकती है।
इसलिए किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति या नियमित दवा लेने वाले लोगों के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करना सही नहीं माना जाता। वजन कम करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे सुरक्षित तरीके से करना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्टों और अध्ययनों में सामने आई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या नियमित दवा के मामले में फास्टिंग शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लें।
